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शहर सिर्फ सड़कें और इमारतें नहीं, नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है

हेमलता शर्मा

हेमलता शर्मा

संपादकीय

20 सित 2026, 10:20 AM 108 व्यूज़
शहर सिर्फ सड़कें और इमारतें नहीं, नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है

शहर सिर्फ सड़कें और इमारतें नहीं, नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है

शहर सिर्फ सड़कें और इमारतें नहीं, नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है जयपुर के बाजारों में आग की घटनाएं शहरी सुरक्षा, फायर सेफ्टी, अतिक्रमण और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। क्या हादसे के बाद कार्रवाई से पहले रोकथाम पर ध्यान नहीं देना चाहिए?

शहर सिर्फ सड़कें और इमारतें नहीं, नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी है

संपादकीय: किसी शहर की पहचान केवल उसकी चौड़ी सड़कों, ऊंची इमारतों, बाजारों और विकास परियोजनाओं से नहीं होती। एक शहर वास्तव में कितना विकसित है, इसकी एक बड़ी कसौटी यह भी है कि वहां रहने वाले नागरिक कितने सुरक्षित हैं।

जयपुर के पुरोहित जी का कटला क्षेत्र में हुई आग की घटना ने एक बार फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार 17 सितंबर को लगी आग में सेठी कॉम्प्लेक्स की 18 दुकानें प्रभावित हुईं। घटना के बाद राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए और जयपुर नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी को निलंबित किया। 1

सवाल केवल एक हादसे का नहीं

किसी भी आग के बाद सबसे पहला सवाल होता है कि आग कैसे लगी। लेकिन इसके साथ दूसरा और ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल होना चाहिए—क्या ऐसी घटना के नुकसान को कम किया जा सकता था?

जयपुर के पुराने शहर के कई बाजार संकरी गलियों, घनी दुकानों और बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही के लिए जाने जाते हैं। ऐसी जगहों पर आग जैसी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड के वाहनों की पहुंच, आपातकालीन रास्ते, अग्निशमन उपकरण और निकासी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। हाल की घटना के बाद पुराने शहर के दूसरे बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। 2

हादसे के बाद कार्रवाई जरूरी, लेकिन रोकथाम उससे भी जरूरी

जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन किसी हादसे के बाद कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है। असली प्रशासनिक सफलता तब होगी जब संभावित खतरे की पहचान हादसे से पहले कर ली जाए।

फायर सेफ्टी निरीक्षण केवल कागजी प्रक्रिया न हो। बाजारों, व्यावसायिक परिसरों, अस्पतालों, स्कूलों और भीड़भाड़ वाले भवनों में सुरक्षा मानकों की नियमित समीक्षा होनी चाहिए। जहां कमी मिले, वहां समय रहते सुधार कराया जाना चाहिए।

अतिक्रमण और संकरी गलियां भी सुरक्षा का सवाल

पुराने शहरों की ऐतिहासिक संरचना को बचाना जरूरी है, लेकिन विरासत और नागरिक सुरक्षा के बीच संतुलन भी उतना ही जरूरी है। यदि किसी बाजार की सड़क या गली इतनी संकरी हो जाए कि आपातकाल में दमकल वाहन आसानी से नहीं पहुंच सके, तो यह केवल यातायात की समस्या नहीं बल्कि जीवन सुरक्षा का प्रश्न बन जाता है।

इसलिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को केवल सौंदर्यीकरण के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य आपातकालीन पहुंच और नागरिक सुरक्षा भी होना चाहिए।

व्यापारियों और नागरिकों की भी जिम्मेदारी

सुरक्षित शहर बनाना केवल नगर निगम और अग्निशमन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। दुकानदारों, बाजार संगठनों और आम नागरिकों को भी सुरक्षा नियमों को गंभीरता से लेना होगा। दुकान के बाहर रास्ता रोकने वाला सामान रखना, आपातकालीन मार्ग को बाधित करना या सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी करना छोटी बात लग सकती है, लेकिन आपदा के समय इसका प्रभाव गंभीर हो सकता है।

क्या हर बाजार का सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए?

जयपुर जैसे ऐतिहासिक और पर्यटन आधारित शहर में नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। विशेष रूप से पुराने बाजारों और भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक क्षेत्रों में यह देखा जाना चाहिए कि:

  • दमकल वाहनों के लिए पर्याप्त रास्ता उपलब्ध है या नहीं।
  • आपातकालीन निकासी मार्ग खुले हैं या नहीं।
  • अग्निशमन उपकरण काम करने की स्थिति में हैं या नहीं।
  • विद्युत वायरिंग और अन्य संभावित जोखिमों की नियमित जांच होती है या नहीं।
  • व्यापारियों और कर्मचारियों को आपात स्थिति में क्या करना है, इसकी जानकारी है या नहीं।

जवाबदेही के साथ व्यवस्था में सुधार भी जरूरी

किसी घटना के बाद किसी अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई होना जवाबदेही का एक हिस्सा है। लेकिन यदि वही समस्या दूसरे बाजार में दोबारा सामने आती है, तो केवल व्यक्ति बदलने से व्यवस्था नहीं बदलेगी। जरूरत ऐसी प्रणाली की है जिसमें जोखिम की पहचान, निरीक्षण, रिकॉर्ड, सुधार और फॉलो-अप की स्पष्ट व्यवस्था हो।

प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सुरक्षा नियम केवल निरीक्षण के समय दिखाई देने वाली औपचारिकता न बनें, बल्कि रोजमर्रा की व्यवस्था का हिस्सा हों।

विकास की असली कसौटी

हम स्मार्ट सिटी, आधुनिक सड़कें, पर्यटन और बड़े विकास प्रोजेक्ट की बात करते हैं। यह सब जरूरी है। लेकिन विकास की असली कसौटी यह भी है कि शहर अपने नागरिकों को कितनी सुरक्षित और व्यवस्थित जिंदगी देता है।

एक सुंदर बाजार तभी सफल है जब वहां व्यापार भी सुरक्षित हो और ग्राहक भी। एक पुरानी इमारत तभी विरासत है जब उसकी ऐतिहासिक पहचान के साथ उसमें काम करने और आने वाले लोगों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए।

अब सवाल हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले पूछना होगा

हर हादसे के बाद जांच होती है, जिम्मेदारी तय होती है और कुछ समय तक सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा होती है। लेकिन एक जिम्मेदार शहर वह होगा जहां प्रशासन और नागरिक मिलकर यह सवाल पहले पूछें कि “यह हादसा होने से कैसे रोका जा सकता है?”

जयपुर की हालिया घटना को केवल एक बाजार की दुर्घटना के रूप में देखने के बजाय पूरे शहर की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा का अवसर माना जाना चाहिए। पुराने शहर से लेकर नए व्यावसायिक क्षेत्रों तक, सुरक्षा मानकों की नियमित जांच और उनका पालन सुनिश्चित करना समय की जरूरत है।

क्योंकि शहर केवल इमारतों से नहीं बनता। शहर उन लोगों से बनता है जो वहां रहते हैं, काम करते हैं और रोज अपनी जिंदगी आगे बढ़ाते हैं। इसलिए किसी भी विकास की पहली शर्त होनी चाहिए—नागरिक सुरक्षित रहें।

The CounterIndia Editorial: हादसे के बाद कार्रवाई जरूरी है, लेकिन ऐसी व्यवस्था बनाना उससे भी जरूरी है जिसमें संभावित हादसे को पहले ही रोका जा सके।

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