हाईकोर्ट ने जताई चिंता : कहा- अपनी बात रखने के लिए जजों के पास न्यायिक आदेशों के अलावा कोई मंच नहीं बचा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायाधीशों के बीच संस्थागत संवाद को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने 80 पन्नों के फैसले में कहा कि पिछले 10 वर्षों में केवल 16 फुल कोर्ट बैठकें हुईं, जबकि नियमों...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायाधीशों के बीच संस्थागत संवाद को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने 80 पन्नों के फैसले में कहा कि पिछले 10 वर्षों में केवल 16 फुल कोर्ट बैठकें हुईं, जबकि नियमों...
स्रोत: अमर उजाला — उत्तर प्रदेश — पूरी खबर मूल साइट पर पढ़ें।
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