हाईकोर्ट ने उठाया सवाल : एक ही साक्ष्य को एक आरोप में अविश्वसनीय मानना तो दूसरे में स्वीकार करना उचित नहीं है
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 42 साल पुराने आपराधिक मामले में बांदा निवासी बलराम को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने कहा कि एक ही साक्ष्य को एक आरोप में अविश्वसनीय मानना तो दूसरे में स्वीकार करना उचित नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 42 साल पुराने आपराधिक मामले में बांदा निवासी बलराम को दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति अब्दुल शाहिद की एकल पीठ ने कहा कि एक ही साक्ष्य को एक आरोप में अविश्वसनीय मानना तो दूसरे में स्वीकार करना उचित नहीं है।
स्रोत: अमर उजाला — उत्तर प्रदेश — पूरी खबर मूल साइट पर पढ़ें।
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